इंदौर पुलिस गवाह घोटाला: कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल
इंदौर पुलिस गवाह घोटाला एक बार फिर मध्यप्रदेश की पुलिस व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर रहा है। खजराना थाना क्षेत्र में हत्या, दुष्कर्म, पॉक्सो, लूट और एनडीपीएस जैसे 1250 गंभीर आपराधिक मामलों में सिर्फ दो लोगों को गवाह बनाकर पेश किए जाने का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद भी नहीं लिया सबक
इससे पहले चंदन नगर थाना से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने 165 मामलों में दो ही गवाह होने का तथ्य सामने आया था। उस वक्त न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने थाना प्रभारी को कड़ी फटकार लगाई थी। बावजूद इसके, इंदौर पुलिस की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं दिखा।
333 गंभीर अपराधों में भी वही गवाह
जांच में सामने आया कि कुल 1250 मामलों में से 333 केस दुष्कर्म, पॉक्सो, हत्या और एनडीपीएस जैसे संगीन अपराधों से जुड़े हैं। हैरानी की बात यह है कि इन मामलों में भी पुलिस ने इरशाद पुत्र अब्दुल हकीम और नवीन पुत्र रामचंद्र चौहान को ही गवाह बना दिया।
बिना जानकारी के बना दिए गए गवाह
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि कई मामलों में तथाकथित गवाहों को यह तक जानकारी नहीं थी कि वे किसी केस में गवाह हैं। जांच में खुलासा हुआ कि पुलिसकर्मियों ने खुद ही जाली हस्ताक्षर कर गिरफ्तारी मेमो, पंचनामा और जब्ती पत्रक तैयार कर दिए।
पुलिस से दोस्ती का उठाया गया फायदा
पूछताछ में गवाहों ने बताया कि उनकी पुलिसकर्मियों से दोस्ती थी, थाने में आना-जाना रहता था। गवाह न मिलने पर पुलिसकर्मी खुद ही उनके नाम से दस्तावेज तैयार कर लेते थे और बाद में कोर्ट में पेश कर देते थे।फर्जी गवाह कांड पर विभागीय जांच शुरू
इंदौर पुलिस गवाह घोटाला सामने आने के बाद पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी स्तर की विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। जोन-1 के डीसीपी कृष्ण लालचंदानी ने तत्कालीन टीआई दिनेश वर्मा को नोटिस जारी किया है।
2022-2023 के मामलों में हुआ फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आया कि यह पूरा फर्जीवाड़ा वर्ष 2022 से 2023 के बीच दर्ज मामलों से जुड़ा है। प्रारंभिक रिपोर्ट में कई दस्तावेजों पर नकली हस्ताक्षर पाए गए हैं।
न्याय व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इंदौर पुलिस गवाह घोटाला सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधा हमला है। फर्जी गवाहों के आधार पर दिए गए फैसलों की वैधता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
अब विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर
दोषी पुलिसकर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई
फर्जी गवाही वाले मामलों की पुनः समीक्षा
जिम्मेदार अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई
की संभावना जताई जा रही है।
Author: kamlesh verma
कमलेश वर्मा एक डिजिटल पत्रकार, SEO कंटेंट राइटर और न्यूज़ कंटेंट क्रिएटर हैं। वे मौसम, कृषि, सरकारी योजनाओं, स्थानीय समाचार और जनहित से जुड़े विषयों पर तथ्यात्मक एवं आसान भाषा में लेख लिखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, भरोसेमंद और उपयोगी जानकारी समय पर पहुंचाना है। वे SEO-अनुकूल कंटेंट तैयार करने में भी विशेषज्ञता रखते हैं, जिससे पाठकों को विश्वसनीय समाचार और जानकारी आसानी से मिल सके।






