छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला? दोषी शिक्षकों से फिर कराया जा रहा बोर्ड मूल्यांकन कार्य

राजनांदगांव में बोर्ड परीक्षा मूल्यांकन विवाद से जुड़ी समाचार कटिंग और दोषी व्याख्याताओं पर कार्रवाई की रिपोर्ट

शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग –  छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन कार्य में गंभीर गड़बड़ियों और गलत अंक बढ़ाने के आरोपों में दोषी पाए गए व्याख्याताओं पर कार्रवाई होने के बावजूद उन्हें दोबारा मूल्यांकन कार्य में लगाया जाना अब पूरे शिक्षा तंत्र की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।

मामला उस समय और गंभीर हो गया जब समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्ट, विभागीय आदेश और शिकायत पत्र सामने आए। इन दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि वर्ष 2024 की बोर्ड परीक्षा में गलत मूल्यांकन करने वाले कुछ शिक्षकों पर दंडात्मक कार्रवाई की गई थी, लेकिन वर्ष 2026 में वही शिक्षक फिर से मूल्यांकन कार्य में सक्रिय पाए गए।

2024 में हुई थी कार्रवाई

माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा वर्ष 2024 की बोर्ड परीक्षा के दौरान कई शिक्षकों को गलत मूल्यांकन, अंक वृद्धि और मूल्यांकन प्रक्रिया में लापरवाही का दोषी पाया गया था। विभागीय आदेश के अनुसार इन शिक्षकों की वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने तथा उन्हें मूल्यांकन कार्य से अलग रखने के निर्देश जारी किए गए थे।

सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई इसलिए की गई थी क्योंकि कई विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में वास्तविक अंकों से अधिक अंक दिए गए थे। इससे परीक्षा परिणाम की विश्वसनीयता पर असर पड़ा था।

कार्रवाई के बाद भी नहीं रुकी लापरवाही

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कार्रवाई के बाद भी विभागीय स्तर पर इन शिक्षकों को दोबारा बोर्ड मूल्यांकन कार्य में शामिल कर लिया गया। आरोप है कि आदेश केवल कागजों तक सीमित रह गए और जमीनी स्तर पर किसी भी प्रकार का पालन नहीं किया गया।

समाचार पत्रों में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, जिन शिक्षकों को तीन से पांच वर्षों तक मूल्यांकन कार्य से दूर रखने का निर्देश था, वे फिर से कॉपियों की जांच करते नजर आए। इससे छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

दोषी पाए गए व्याख्याताओं के नाम

रिपोर्ट और दस्तावेजों के अनुसार निम्न व्याख्याताओं के नाम सामने आए हैं जिन पर गलत मूल्यांकन और अंक वृद्धि के आरोप लगे थे —

  1. श्रीमती शैल परमार – सरस्वती स्कूल, राजनांदगांव
  2. साजिद कुरैशी – हाईस्कूल उपरवाह
  3. भावना पाल – सर्वेश्वरदास स्कूल
  4. देवनारायण वर्मा – टोलागांव
  5. विवेक देवांगन – सेजेस छुरिया
  6. हुकुमलाल चतुर्वेदी – आसरा
  7. मीना वहाद – उमरवाही
  8. प्रमोद भारद्वाज – रानीतराई

बताया गया है कि इन शिक्षकों पर 50 या उससे अधिक अंकों की गलत वृद्धि के आरोप थे। इसके बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर द्वारा आदेश क्रमांक 1419/2024 दिनांक 22 अगस्त 2024 जारी कर कार्रवाई की गई थी।

शिकायत पत्र में मंत्री से की गई कार्रवाई की मांग

मामले को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री को एक शिकायत पत्र भी भेजा गया है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2024 में दोषी पाए गए व्याख्याता साजिद कुरैशी को वर्ष 2026 में फिर से मूल्यांकन कार्य सौंप दिया गया।

पत्र में कहा गया है कि यह न केवल विभागीय आदेशों की अवहेलना है बल्कि इससे शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि —

  • छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है
  • परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता प्रभावित हो रही है
  • विभागीय आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा
  • दोषी शिक्षकों को संरक्षण दिया जा रहा है

7 हजार हिंदी कॉपियों का 4 दिनों में मूल्यांकन

इसी बीच एक अन्य समाचार में बताया गया कि राजनांदगांव के स्टेट हाईस्कूल मूल्यांकन केंद्र में 12वीं बोर्ड की लगभग 7 हजार हिंदी विषय की कॉपियों का मात्र चार दिनों में मूल्यांकन पूरा कर लिया गया।

जानकारी के अनुसार —

  • 10 अप्रैल से मूल्यांकन शुरू हुआ
  • 13 अप्रैल से मूल्यांकन कार्य प्रारंभ किया गया
  • लगभग 157 शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई
  • अन्य जिलों से भी कॉपियां भेजी गई थीं

हालांकि इतनी बड़ी संख्या में कम समय में मूल्यांकन पूरा होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दबाजी में किया गया मूल्यांकन विद्यार्थियों के परिणामों को प्रभावित कर सकता है।

शिक्षा विभाग पर उठ रहे गंभीर सवाल

पूरे मामले के सामने आने के बाद अब कई महत्वपूर्ण सवाल उठ रहे हैं —

1. क्या विभागीय आदेश केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं?

यदि दोषी शिक्षकों को फिर से मूल्यांकन कार्य में लगाया जा रहा है तो कार्रवाई का क्या महत्व रह जाता है?

2. छात्रों के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?

गलत मूल्यांकन का सीधा असर विद्यार्थियों के करियर और भविष्य पर पड़ता है।

3. क्या दोषियों को संरक्षण मिल रहा है?

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि विभागीय स्तर पर कुछ लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

4. क्या निष्पक्ष जांच होगी?

अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

विपक्ष और अभिभावकों में नाराजगी

मामला सामने आने के बाद अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े लोगों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि मूल्यांकन प्रक्रिया ही पारदर्शी नहीं रहेगी तो मेहनती छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।

शिक्षा विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि —

  • मूल्यांकन प्रक्रिया की डिजिटल मॉनिटरिंग हो
  • दोषी शिक्षकों पर स्थायी प्रतिबंध लगाया जाए
  • दोबारा मूल्यांकन की स्वतंत्र व्यवस्था बने
  • छात्रों को शिकायत दर्ज कराने का अधिकार मिले

निष्कर्ष

राजनांदगांव से सामने आया यह मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि गलत मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई के बावजूद उन्हें फिर से वही जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो इससे छात्रों का भरोसा शिक्षा व्यवस्था से उठ सकता है।

अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

kamlesh verma
Author: kamlesh verma

कमलेश वर्मा एक डिजिटल पत्रकार, SEO कंटेंट राइटर और न्यूज़ कंटेंट क्रिएटर हैं। वे मौसम, कृषि, सरकारी योजनाओं, स्थानीय समाचार और जनहित से जुड़े विषयों पर तथ्यात्मक एवं आसान भाषा में लेख लिखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, भरोसेमंद और उपयोगी जानकारी समय पर पहुंचाना है। वे SEO-अनुकूल कंटेंट तैयार करने में भी विशेषज्ञता रखते हैं, जिससे पाठकों को विश्वसनीय समाचार और जानकारी आसानी से मिल सके।

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